आज कोरोनावायरस पैन्डेमिक ने युग के समाप्ति की घोषणा कर दी है। संसार के लगभग सभी विचारक इस बात को मानने भी लगे हैं कि कोरोना पश्चात की देशकाल वयवस्था वैसी नहीं रह जायेगी, जैसे पहले थी। धरती के प्रत्येक कोने का चिंतनशील समाज नये युग का ताना-बाना भी बुनने लगा है। भविष्य की अनिश्चितता पीछे की ओर लौटने को विवश कर रही है। समाजवाद और भू-सांस्कृतिकी जैसे विचार अपनी प्रासंगिकता तलाश रहे हैं और इसतरह सभ्यता के प्रारम्भ से निरन्तर प्रगतिगामी सत्य की खोज उल्टी दिशा में वापस मुड़ चुकी है। क्या हमारे विचार के पश्चगामी हो जाने से वक्त का पहिया भी वापस मुड़ जायेगा ? क्या हमारे समक्ष आने वाली परिस्थितियां बीते युग के जैसी ही होंगी ? क्या बीते युग का इतिहास हमारे समक्ष आगे आने वाली चुनौतियों से निपटने का कोई सार्थक उपाय सुझा पायेगा ? न तो वक्त का पहिया पीछे ही मुड़ेगा और न आगे आने वाली चुनौतियों का हल इतिहास दे पायेगा। इसलिए युग के साथ-साथ इतिहास का भी अन्त समझिए और अन्त समझिए उन सारे विचारों का भी जो अतीत में हमारी समस्या सुलझाने में नाकाम साबित हुए थे। सत्य की खोज के क्रमिक विकास में ही हमें नय...
यह पटल एक रचनात्मक विमर्श का पटल है। साहित्यिक अभिवृत्ति को विमर्श का स्तर देकर सामाजिक-सांस्कृतिक नवजागरण की सृष्टि करना इस पटल का मुख्य लक्ष्य है। उत्तरआधुनिक युग में सांस्कृतिक पुनर्जागरण से ही मानवता का कल्याण हो सकता है। एतदर्थ धर्म, जाति और नस्ल के दुराग्रहों से मुक्त पारस्परिक सहयोगी व सहकारी संस्कृति के पुनरुत्थान में सहयोग करना इस पटल का मुख्य धर्म है।