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Showing posts from April, 2020

युग का अन्त और नये सत्य की खोज

आज कोरोनावायरस पैन्डेमिक ने युग के समाप्ति की घोषणा कर दी है। संसार के लगभग सभी विचारक इस बात को मानने भी लगे हैं कि कोरोना पश्चात की देशकाल वयवस्था वैसी नहीं रह जायेगी, जैसे पहले थी। धरती के प्रत्येक कोने का चिंतनशील समाज नये युग का ताना-बाना भी बुनने लगा है। भविष्य की अनिश्चितता पीछे की ओर लौटने को विवश कर रही है। समाजवाद और भू-सांस्कृतिकी जैसे विचार अपनी प्रासंगिकता तलाश रहे हैं और इसतरह सभ्यता के प्रारम्भ से निरन्तर प्रगतिगामी सत्य की खोज उल्टी दिशा में वापस मुड़ चुकी है। क्या हमारे विचार के पश्चगामी हो जाने से वक्त का पहिया भी वापस मुड़ जायेगा ? क्या हमारे समक्ष आने वाली परिस्थितियां बीते युग के जैसी ही होंगी ? क्या बीते युग का इतिहास हमारे समक्ष आगे आने वाली चुनौतियों से निपटने का कोई सार्थक उपाय सुझा पायेगा ? न तो वक्त का पहिया पीछे ही मुड़ेगा और न आगे आने वाली चुनौतियों का हल इतिहास दे पायेगा। इसलिए युग के साथ-साथ इतिहास का भी अन्त समझिए और अन्त समझिए उन सारे विचारों का भी जो अतीत में हमारी समस्या सुलझाने में नाकाम साबित हुए थे।  सत्य की खोज के क्रमिक विकास में ही हमें नय...